Guru nanak biography in hindi. गुरु नानक देव जी की जीवनी Guru Nanak Dev Ji Biography Hindi 2022-10-27

Guru nanak biography in hindi Rating: 9,3/10 652 reviews

Guru Nanak Dev Ji, the founder of Sikhism, was born in the year 1469 in the village of Talwandi, located in the Punjab region of India. His father, Mehta Kalu, was a local tax collector, and his mother, Mata Tripta, was a homemaker. From a young age, Guru Nanak showed a deep spiritual curiosity and a desire to understand the nature of God.

As a young man, Guru Nanak traveled extensively throughout India and the Middle East, spreading his teachings and spreading the message of love, compassion, and unity. He believed that all people, regardless of their religion, caste, or social status, were equal in the eyes of God and should be treated with respect and kindness.

Guru Nanak's teachings were revolutionary for the time, as they challenged the rigid social hierarchy and the strict adherence to religious rituals that were prevalent in India. He preached that the true path to enlightenment lay in leading a virtuous and honest life, and that true devotion to God could only be achieved through selfless service to others.

Guru Nanak's teachings found a receptive audience, and he soon attracted a large following of devotees. He established a new religious tradition known as Sikhism, which emphasized the importance of living a simple, humble, and honest life and serving others.

Guru Nanak's teachings continue to inspire millions of people around the world today. His message of love, compassion, and unity is as relevant today as it was in the 15th century. His legacy lives on through the teachings of the Sikh faith, which continues to grow and flourish around the world. In conclusion, Guru Nanak Dev Ji was a remarkable spiritual leader who dedicated his life to spreading the message of love and unity and whose teachings continue to inspire and guide people of all faiths to this day.

गुरु नानक

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मैं इसे क्या पढ़ाउंगा यह तो सारी दुनिया को पढ़ा सकता है. उसमें जपजी एक मुख्य कविता है जिससे नानक के आध्यात्मिक विचारों का पता चलता हैं. Miracles in Religion: A Study of the miraculous in religion in context of the Bahá'í Faith. इन दोनों शब्दों का अर्थ एक ही है. इनके माता का नाम तृप्ता देवी तथा पिता का नाम कालू था. गुरु नानक जी के दो पुत्र श्रीचंद और लख्मी चंद थें। Q.


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Guru Nanak

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Guru Nanak Biography in Hindi आज के इस पोस्ट में आपको सिखों के पहले गुरु नानक जी के जीवन के बारे में जानने को मिलेगा, जिन्होंने अपनी यात्रा में धार्मिक सुधार मानव के कल्याण के जीवन में समर्पित कर दिया। और साथ ही जानेंगे क्यों गुरु नानक जयंती मनाई जाती है, तथा साथ ही उनके जीवन पर भी एक नजर डालेंगे। गुरु नानक जी का जीवन परिचय Guru Nanak Biography in Hindi गुरु नानक जी जिन्हे गुरु नानक देव जी के नाम से जाना जाता है, यह सिखों के प्रथम गुरु हैं, जिन्हें लोग नानक, नानक देव जी, बाबा नानक और नानकशाह नामों से संबोधित करते हैं। इनका जन्म अप्रैल 1469 को तलवंडी गांव में माना जाता है। गुरु नानक देव जी के व्यक्तित्व में एक दार्शनिक एक योगी एक गृहस्थी एक धर्म सुधारक एक समाज सुधारक एक कवि और एक देशभक्त के गुण थे। गुरु नानक जी की मृत्यु 22 सितंबर 1540 ईस्वी में पाकिस्तान के करतारपुर में हुई थी। नाम गुरु नानक देव जाने जाते सिखों के प्रथम गुरु जन्म अप्रैल 1469 जन्म स्थान तलवंडी पाकिस्तान में पंजाब प्रांत का एक नगर कार्य दार्शनिक, धर्म सुधारक, समाज सुधारक, और कवि परिवार पिता का नाम मेहता कालू माता का नाम तृप्ता देवी माता का नाम तृप्ता देवी पत्नी माता सुलखनी पुत्र श्रीचंद और लखमी दास मृत्यु 22 सितंबर 1539 मृत्यु स्थान करतारपुर Guru Nanak Biography in Hindi प्रारंभिक जीवन — guru nanak ji story in hindi गुरु नानक साहब यानि गुरु नानक देव जी का जन्म तलवंडी नामक गांव में रावी नदी के किनारे स्थित कार्तिक पूर्णिमा को हुआ था। बता दें कि तलवंडी पाकिस्तान में पंजाब प्रांत का एक नगर है, जो आगे चलकर गुरु नानक जी के नाम पर ननकाना पड़ गया। गुरु नानक देव जी खत्री यानी क्षेत्रीय कुल में जन्मे थे, कुछ विद्वान लोगों का मानना है कि गुरु नानक जी का जन्म 15 अप्रैल 1469 को हुआ था, लेकिन प्रचलित तिथि के चलते गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा को अक्टूबर नवंबर के दिवाली के 15 दिन बाद मानते हैं। नानक जी के परिवार में उनके पिता का नाम मेहता कालू चंद खत्री तथा माता का नाम तृप्ता देवी है। गुरु नानक देव जी के पिता एक पटवारी जाने सरकारी कर्मचारी थे, इसलिए वह भी चाहते थे कि उनका पुत्र यानी गुरु नानक जी आगे चलकर सरकारी पद प्राप्त करें इसलिए उन्होंने गुरु नानक जी को उचित शिक्षा प्राप्त करने पर जोर दिया। उन्होंने गुरु नानक जी को हिंदी संस्कृत के साथ-साथ फारसी भाषा की शिक्षा भी दी। हालांकि उन्हें पढ़ने लिखने में कोई दिलचस्पी नहीं थी इसलिए उनके पिता ने गुरु नानक जी को खेती बाड़ी का काम सिखाया लेकिन वहां भी उनका मन नहीं लगा इसके विपरीत गुरु नानक देव जी का अध्यात्मिक धर्म तथा सांसारिक विषयों के क्षेत्र में काफी रुचि थी जिसके चलते बचपन से ही उनमें प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने लगे। गुरु नानक जी का विवाह — 16 साल की उम्र में गुरु नानक जी का विवाह गुरदासपुर जिले के लखोंकी नामक स्थान के रहने वाले मुला की कन्या सुलखनी से हुआ था। और लगभग 32 वर्ष की अवस्था में इनका पहला पुत्र श्री चंद का जन्म हुआ तथा 4 वर्ष बाद उनका दूसरा पुत्र लखमीदास का जन्म हुआ। यहां से गुरु नानक देव जी का अपने ग्रस्त जीवन में मन नहीं लगता था जिसके चलते उन्होंने अपना परिवार और घर त्याग करने का सोचा और निकल गए अपने मित्र के साथ तीर्थ यात्रा पर। उदासियाँ about guru nanak dev ji in hindi अपना घर त्याग करने के बाद गुरु नानक जी ने अन्य चार साथियों मरदाना, लहना, बाला और रामदास भी उनकी इस यात्रा में शामिल हुए। 1521 तक उन्होंने कई यात्राएं की और अपनी यात्रा के दौरान वह सब को उपदेश देते और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूक करते थे। उन्होंने यात्रा के दौरान भारत का भ्रमण किया साथ ही उन्होंने भारत के दक्षिण क्षेत्र श्रीलंका तथा अन्य देश अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों में यात्राएं की । इन यात्राओं को पंजाबी में उदासियां के नाम से जाना जाता है। गुरु नानक जी को शुरू से ही सन्यासियों तथा सांसारिक विषय में रुचि थी जिसके चलते वह अपनी यात्रा के दौरान लोगों का जमावड़ा इकट्ठा करने में सफल होते थे और जागरूक करते थे। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया उन्होंने रूढ़िवादी सोच का विरोध किया और अपने आखिरी समय पाकिस्तान के करतारपुर में बिताया। उनकी मृत्यु 22 सितंबर 1539 को करतारपुर में हुई थी। जाते-जाते उन्होंने अपने तीन मूल सिद्धांत जपो, कीरत करो और बंडा चखो थे। साथ ही गुरु नानक देव जी अपनी मृत्यु से पहले अपने शिष्य भाई लहना को उत्तराधिकारी बना गए जो आगे चलकर आखिर क्यों मनाई जाती है गुरु नानक जयंती? Essays in Sikh History, Tradition and Society. इनकी जन्म तिथि को लेकर आज भी इतिहासकारों में मतभेद है. एक दिन जब वे अभ्यास के दौरान नानक से ओम शब्द का उच्चारण करवा रहे थे. मूर्ति पूजा, छुआ-छूत तथा ऊँच-नीच की भेद-भाव का विरोध किया. में तलवंडी आधुनिक ननकाना साहिब, पाकिस्तान के एक मेहता खत्री प्राचीन क्षत्रीय नामक परिवार में हुआ था. गुरुद्वारा अचल साहिब- गुरुदासपुर अपनी यात्राओं के दौरान नानकदेव यहाँ रुके और नाथपन्थी योगियों के प्रमुख योगी भांगर नाथ के साथ उनका धार्मिक वाद-विवाद यहाँ पर हुआ। योगी सभी प्रकार से परास्त होने पर जादुई प्रदर्शन करने लगे। नानकदेवजी ने उन्हें ईश्वर तक प्रेम के माध्यम से ही पहुँचा जा सकता है, ऐसा बताया। 7.


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Guru Nanak Dev Ji biography Hindi: Story, गुरु नानक की जीवनी

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गुरुद्वारा कोठी साहिब- सुल्तानपुर लोधी कपूरथला नवाब दौलतखान लोधी ने हिसाब-किताब में ग़ड़बड़ी की आशंका में नानकदेवजी को जेल भिजवा दिया। लेकिन जब नवाब को अपनी गलती का पता चला तो उन्होंने नानकदेवजी को छोड़ कर माफी ही नहीं माँगी, बल्कि प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव भी रखा, लेकिन गुरु नानक ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। 5. नानक बचपन से ही सांसारिक मोह से मुक्त थे और बहुत ही उदार स्वभाव के थे. गुरु नानक देव जी की जीवनी Guru Nanak Dev Ji Biography Hindi क्या आप गुरु नानक जी का इतिहास हन्दी में पढना चाहते हैं Guru nanak dev ji history hindi me? जिनसे इनके 2 पुत्र श्री चंद और लखमी दास हुए. उनके अनुसार ईश्वर का मनुष्य के रूप में जन्म लेने की कल्पना करना उसे जन्म और मृत्यु के चक्र में बाधना है जबकि ईश्वर इससे मुक्त होता हैं. The Sikh Religion, Its Gurus, Sacred Writings and Authors. A History of the Sikhs. Hello Friends Welcome To Here We Are Rathore Brothers Founder And Owners Of This Website Jiwanparichay.

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Guru Nanak Dev Ji Biography In Hindi रामलला दर्शन और रोचक कहानियाँ।

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गुरुद्वारा हाट साहिब- सुल्तानपुर लोधी कपूरथला गुरुनानक ने बहनोई जैराम के माध्यम से सुल्तानपुर के नवाब के यहाँ शाही भण्डार के देखरेख की नौकरी प्रारम्भ की। वे यहाँ पर मोदी बना दिए गए। नवाब युवा नानक से काफी प्रभावित थे। यहीं से नानक को 'तेरा' शब्द के माध्यम से अपनी मंजिल का आभास हुआ था। 3. अपनी मृत्यु के पहले उन्होंने अपने परम भक्त और शिष्य लहंगा को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया. Final years Around the age of 55, Nanak settled in Kartārīs meaning 'the people who belonged to the village of Kartarpur' by others. आइये आज आप को श्री नानक जी के जीवन परिचय- Biography of Guru Nanak Dev ji से परिचित करवाते है। श्री नानक जी पुण्यात्मा थे जिनका परमेश्वर में असीम प्रेम था। युगों-युगों से ब्रह्म की भक्ति करते हुए आ रहे थे। सत्ययुग में श्री नानक जी राजा अम्ब्रीष थे, त्रेता में यह आत्मा राजा जनक हुए, और कलयुग में यही आत्मा श्री नानक जी बने। पहले के जन्मों में श्री नानक जी के आसपास सब नौकर हुआ करते थे पुण्य के आधार पर। परमात्मा की सही भक्ति ना मिलने के कारण इनकी बैटरी चार्ज नहीं हुई। फिर यह स्वयं एक सुल्तानपुर के नवाब के यहां मोदी खाने में नौकरी करते थे। मगर ऐसी आत्मा भक्ति के बिना रह नहीं सकती। बृजलाल पांडे इनको गीता जी पढ़ाया करते थे। जैसा उन्हें लोक वेद के आधार पर मालूम था। ब्रह्मा, विष्णु, महेश सर्वेश्वर हैं और वह कृष्ण और राम के ऊपर किसी को नहीं मानते थे। श्री नानक देव का जन्म हिन्दु परिवार में श्री कालु राम मेहत्ता खत्री के घर पाकिस्त्तान के जिला लाहौर के तलवंडी नामक गाँव में हुआ। हिंदू परिवार में श्री नानक का जन्म होने के कारण वह सभी देवी देवता की पूजा करते थे। श्री नानक जी अपनी बहन के यहां रहते थे। उनके जीजा सुल्तानपुर के नवाब के यहां मोदी खाने में अच्छी नौकरी करते थे। श्री नानक जी सुल्तानपुर में बेई नदी बहती थी वहां प्रतिदिन स्नान करने जाते थे। कुछ देर वहां एकांत में बैठकर परमात्मा का चिंतन करते थे। जैसा बृजलाल पांडे ने उन्हें बताया उसी प्रकार, परमात्मा चारों युगों में आते हैं और अपनी हंस आत्माओं को सतलोक ले जाते हैं जैसे दादू जी, धर्मदास जी, घीसा जी और गरीब दास जी की आत्मा को सतलोक लेकर गए और दिखाया। उसी प्रकार एक दिन परमात्मा सतपुरुष कबीर देव जिंदा महात्मा के रूप में श्री नानक जी के पास गए। उनसे कहा कि हे महात्मा जी मैं बहुत भटक लिया हूं मुझे कोई सत मार्ग बताने वाला नहीं मिला, मुझे मार्ग बताओ जैसा बृजलाल पांडे ने तुम्हें बताया है उन्होंने लोक वेद के आधार से ज्ञान बताना शुरू किया। नानक जी का कबीर साहेब जी को गुरु बनाना। Guru Nanak Dev Story in Hindi श्री नानक जी ने कबीर परमेश्वर से कहा कि आप मुझे गुरु बना लो बिना गुरु के मोक्ष नहीं हो सकता। परमात्मा पूर्णब्रह्म कबीर साहेब जी बोले कि मैं काशी में रहता हूं और मैंने स्वामी रामानंद जी को गुरु बनाया है लेकिन मेरा संशय समाप्त नहीं हुआ। कबीर परमेश्वर जी ने कहा हे गुरु नानक जी! Diversity and Unity in Federal Countries. अपने बचपन में गुरु नानक देव ने कई प्रादेशिक भाषाएं जैसे फारसी और अरबी आदि का अध्ययन किया. The Indian Subcontinent in Literature for Children and Young Adults: An Annotated Bibliography of English-language Books.

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गुरु नानक देव जी की जीवनी

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New York: State University of New York Press. The Construction of Religious Boundaries: Culture, Identity, and Diversity in the Sikh Tradition. Sikhism: A Guide for the Perplexed. Teachings and legacy Nanak's teachings can be found in the Sikh scripture There are three competing theories on Guru Nanak's teachings. तो बालक नानक ने उनसे ओम शब्द का अर्थ पूछ लिया. Hindu Spirituality: Postclassical and Modern. According to Tradition: Hagiographical Writing in India.

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Guru nanak biography,pic,death गुरु नानक जयंती 2021

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The Oxford Handbook of Sikh Studies. This has been supported by many Sikhs including ਗੁਰ ਪਰਮੇਸਰੁ ਇਕੁ ਹੈ ਸਚਾ ਸਾਹੁ ਜਗਤੁ ਵਣਜਾਰਾ। The Guru and God are one; He is the true master and the whole world craves for Him. We Hope You Will This Website And You Will Share It With Your Friends. गुरु नानक ने करतारपुर नामक नगर बसाया था और वहां एक धर्मशाला गुरुद्वारा बनवाया था. मृत्यु से पहले इन्होंने अपने शिष्य भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया जो बाद में गुरू अंगद देव के नाम से जाने गये. इसी स्थान पर 22 सितंबर 1539 ई. The second theory states that Nanak was a Sikhism does not subscribe to the theory of The third theory is that Guru Nanak is the incarnation of God.

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गुरु नानक जी का जीवन परिचय Guru Nanak Biography In Hindi — Hindi Varsa

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A Popular Dictionary of Sikhism: Sikh Religion and Philosophy. नानक ने कबीर का मार्ग अपनाया. गुरुद्वारा गुरु का बाग- सुल्तानपुर लोधी कपूरथला यह गुरु नानकदेवजी का घर था, जहाँ उनके दो बेटों बाबा श्रीचन्द और बाबा लक्ष्मीदास का जन्म हुआ था। 4. Note आपके पास गुरु नानक के दोहे तस्वीरें या Guru Nanak Dev Ji In Hindi की कोई जानकारी हैं, या दी गयी जानकारी मैं कुछ गलत लगे तो । तो तुरंत हमें कमेंट और ईमेल मैं लिखे हम इसे अपडेट करते रहेंगे धन्यवाद इसके बारेमे भी पढ़िए :-. पंडित गोपालदास पांडे ने नानक को कहा की ओम सर्व रक्षक परमात्मा का नाम है. There may be several reasons for the adoption of the Kattak birthdate by the Sikh community. गुरु नानक का जन्म कहां हुआ? इस पर पंडित जी ने बालक नानक को कहा कि परमात्मा को हम अनेक नामों से पहचानते हैं.

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गुरु नानक जी का जीवन परिचय

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क्या आप गुरु नानक देव जी की पूरी कहानी पढ़ना चाहते हैं? उन्होंने कहा मुझे इन धागों पर विश्वास नहीं है. निचे कमेंट बॉक्स मेंअपनीप्रतिक्रिया जरूर देने का कष्ट करे। आपकी प्रतिक्रिया हमारे लिए मार्गदर्शन हैं। आपके कमेंट से हमें और भी प्रेरक कहानिया लिखने की प्रेरणा मिलेगी और हम इसी तरह आपके लिए लेके आतेरहेंगे एक से बढ़कर एक जीवनी और ज्ञान की बाते।Guru Nanak Dev Ji History In Hindi. उन्होंने धार्मिक कर्मकांडो एवं आडम्बरों की निंदा की. तो उन्होंने उत्तर दिया — मैंने उन पैसों का सच्चा व्यापर किया। जिस जगह पर गुरु नानक जी नें उन गरीब और संत व्यक्तियों को भोजन खिलाया था वहां सच्चा सौदा नाम का गुरुद्वारा बनाया गया है। आखिर में अपनी 25 वर्ष की यात्रा के बाद श्री गुरु नानक देव जी करतारपुर, पंजाब के एक गाँव में किसान के रूप में रहने लगे और बाद में उनकी मृत्यु भी वही हुई। भाई गुरुदास जिनका जन्म गुरु नानक के मृत्यु के 12 वर्ष बाद हुआ बचपन से ही सिख मिशन से जुड़ गए। उन्हें सिख गुरुओं का प्रमुख चुना गया। उन्होंने सिख समुदाय जगह-जगह पर बनाया और अपने बैठक के लिए सभा बनाया जिन्हें धरमशाला के नाम से जाना जाता है। आज के दिन में धरमशालाओं में सिख समुदाय श्री गुरु नानक जी से जुड़े कुछ प्रमुख गुरुद्वारा साहिब 1. New Delhi: Discovery Publishing House. अगर आपको यह पोस्ट पसंद आया हो तो इसे अपने दोस्तों को जरूर शेयर करें! Some of the stories about Guru Nanak's extensive travels first appear in the 19th-century Puratan janamsakhi, though even this version does not mention Nanak's travel to Baghdad.

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Guru Nanak Dev Biography in Hindi

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गुरुद्वारा डेरा बाबा नानक- गुरुदासपुर जीवनभर धार्मिक यात्राओं के माध्यम से बहुत से लोगों को सिख धर्म का अनुयायी बनाने के बाद नानकदेवजी रावी नदी के तट पर स्थित अपने फार्म पर अपना डेरा जमाया और 8. मृत्युस्थान — करतारपुर गुरूनानक का प्रारम्भिक जीवन Early Life of Guru Nanak गुरू नानक का जन्म 1469 ई. गुरुद्वारा कन्ध साहिब- बटाला गुरुदासपुर गुरु नानक का यहाँ बीबी सुलक्षणा से 2. हिंदी साहित्य का इतिहास पुनर्मुद्रण संस्करण. गुरु नानक द्वारा यज्ञोपवित संस्कार का विरोध हिंदू धर्म में बालकों का यज्ञोपवीत संस्कार अर्थात जनेऊ धारण का कार्यक्रम किया जाता है. को इनका स्वर्गवास हो गया. नानक और बाबा फ़रीद के पदों में विचारों की समानता मिलती है.

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गुरु गोबिन्द सिंह

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गुरु नानक जी कौन थे? मेरी शंका का समाधान करें। श्री नानक जी ने श्री बृजलाल पाण्डे से जो सुना था वही ज्ञान परमेश्वर को बताया कि ब्रह्मा, विष्णु तथा शिव तीन लोक के प्रभु हैं। श्री कृष्ण जी सर्व लोकों का धारण, पोषण करते हैं। इनसे ऊपर कोई भगवान नहीं है। श्री कृष्ण जी अजर अमर हैं। जिंदा महात्मा रूप में कबीर परमेश्वर बोले — गीता ज्ञान दाता प्रभु ने गीता अध्याय 7 श्लोक 18 में कहा है कि मेरी पूजा भी अति घटिया है। इसलिए गीता अध्याय 15 श्लोक 4, अध्याय 18 श्लोक 62 में कहा है कि उस परमेश्वर की शरण में जा जिसकी कृपा से ही तू परम शान्ति तथा सनातन परम धाम सतलोक चला जाएगा। परमेश्वर ने सृष्टि रचना सुनाई और बताया कि श्री देवी महापुराण तीसरा स्कंद में स्वयं विष्णु जी ने कहा है कि मैं विष्णु तथा ब्रह्मा व शिव तो नाशवान हैं, अविनाशी नहीं हैं। नानक जी श्री कृष्ण को ही सर्वेश्वर मानते थे। उन्होंने परमेश्वर कबीर साहिब से कहा कि आपकी बात को मेरा मन स्वीकार नहीं कर रहा है। श्री नानक जी की अरूचि देखकर परमात्मा वहां से चले गए। फिर श्री नानक जी जान गए कि मेरा ज्ञान पूर्ण नहीं है। इसलिए प्रतिदिन प्रार्थना करते थे कि एक बार वह संत मिल जाए। मैं उससे कोई वाद-विवाद नहीं करूंगा। कुछ समय के बाद जिन्दा फकीर रूप में कबीर जी ने उसी बेई नदी के किनारे पहुँच कर श्री नानक जी को राम-राम कहा। उस समय श्री नानक जी कपड़े उतार कर स्नान के लिए तैयार थे। जिन्दा महात्मा केवल श्री नानक जी को दिखाई दे रहे थे अन्य को नहीं। श्री नानक जी से वार्ता करने लगे। परमेश्वर ने बताया कि एक पूर्ण परमात्मा है, उसका अमर स्थान सतलोक है। उस परमात्मा की भक्ति करने से मोक्ष प्राप्त हो जाता है। श्री नानक जी ने कहा कि मैं आपकी एक परीक्षा लेना चाहता हूँ। मैं इस दरिया में छुपूँगा और आप मुझे ढूंढ़ना। यदि आप मुझे ढूंढ दोगे तो मैं आपकी बात पर विश्वास कर लूँगा। यह कह कर श्री नानक जी ने बेई नदी में डुबकी लगाई तथा मछली का रूप धारण कर लिया। जिन्दा फकीर ने उस मछली को पकड़ कर जिधर से पानी आ रहा था उस ओर लगभग तीन किलो मीटर दूर ले गए तथा श्री नानक जी बना दिया। कबीर साहेब जी का नानक जी को सृष्टि रचना सुनना। तब नानक जी ने कहा कि मैं आपकी सारी बातें सुनूँगा। कबीर परमेश्वर ने सृष्टि रचना दोबारा सुनाई व बताया कि मैं ही पूर्ण परमात्मा हूँ मेरा स्थान सच्चखण्ड है। आप मेरी आत्मा हो। काल ब्रह्म ने सभी आत्माओं को गुमराह कर रखा है। 84 लाख योनियों में परेशान कर रहा है। मैं आपको सच्चानाम दूँगा जो किसी शास्त्र में नहीं है। कबीर साहेब जी श्री नानक जी की पुण्यात्मा को सत्यलोक ले गए। वहां कबीर परमेश्वर को जिन्दा रूप में बैठे देखा।तब नानक जी ने कहा कि वाहे गुरु। फिर नानक जी की आत्मा को साहेब कबीर जी ने वापस शरीर में प्रवेश कर दिया। तीसरे दिन श्री नानक जी होश में आऐ। उनको जीवित देखकर घर वालों की खुशी का ठिकाना न रहा। श्री नानक जी अपनी नौकरी पर चले गए। मोदी खाने का दरवाजा खोल दिया तथा पूरा खजाना लुटा कर शमशान घाट पर बैठ गए। यह बात मालिक सुल्तानपुर के नवाब को पता चली तब उन्होंने खजाने का हिसाब करवाया तो सात सौ साठ रूपये अधिक मिले। नवाब ने क्षमा याचना की और नौकरी पर वापिस आने को कहा। लेकिन श्री नानक जी ने कहा कि अब सच्ची सरकार की नौकरी करूँगा। उस दिन के बाद श्री नानक जी घर त्याग कर पूर्ण परमात्मा की खोज करने के लिए चल पड़े। जैसा की कबीर साहेब ने बताया था कि मैं बनारस काशी में रहता हूँ। धाणक जुलाहे का कार्य करता हूँ। तो नानक जी काशी पहुंच गए और श्री रामानन्द जी से वार्ता की तथा सच्चखण्ड का वर्णन शुरू किया। रामानन्द जी ने बताया कि परमेश्वर स्वयं कबीर नाम से आया हुआ है तथा मर्यादा बनाए रखने के लिए मुझे गुरु कहता है परन्तु मेरे लिए प्राण प्रिय प्रभु है। श्री नानक जी ने पूछा कि कहाँ हैं कबीर साहेब जी? यह तो सभी जानते हैं, गुरु नानक देव जी सिख समुदाय के पहले गुरु और इस धर्म के संस्थापक भी थे। उन्होंने कई देशों में यात्रा की और अपने उपदेश देकर लोगों की भलाई और मानव समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दी। इसलिए हर साल गुरु नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। इस दिन सिख धर्म के लोग गुरु नानक जयंती के रूप में मनाते हैं और इस दिन पंजाबी समुदाय के लोग ढोल मंजीरे के साथ-साथ प्रभात फेरी भी निकालते हैं। see also — इन्हे भी पढ़े kabir das ka jivan parichay read also नोट- यह संपूर्ण बायोग्राफी का श्रय हम गुरु नानक जी को देते हैं क्योंकि ये पूरी जीवनी उन्हीं के जीवन पर आधारित है और उन्हीं के जीवन से ली गई है। उम्मीद करते हैं यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। हमें कमेंट करके बताइयेगा कि आपको यह आर्टिकल कैसा लगा? नानक की हाजिर जवाबी के कारण मौलवी ने मेहता कालू राय से कहा कि तेरा बेटा खुदा का रूप है. Sikhs and Sikhism: Comprising Guru Nanak and the Sikh Religion, Early Sikh Tradition, The Evolution of the Sikh Community, Who is a Sikh?. The A to Z of Sikhism. मुझे जल्दी मिलवा दें। रामानन्द जी ने एक सेवक को श्री नानक जी के साथ कबीर साहेब जी की झोपड़ी पर भेजा। उस सेवक से सच्चखंड की वार्ता हुई तब श्री नानक जी को आश्चर्य हुआ कि मेरे से तो कबीर साहेब के चाकर सेवक भी अधिक ज्ञान रखते हैं। जब नानक जी ने देखा यह धाणक वही परमेश्वर है जिसके दर्शन सच्चखण्ड में किए तथा बेई नदी पर हुए थे। यहाँ जुलाहे के वेश में हैं। वही मोहिनी सूरत जो सच्चखण्ड में भी विराजमान था। वही करतार आज धाणक रूप में बैठा है। श्री नानक जी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। आँखों में आँसू भर गए। तब श्री नानक जी ने पूर्ण परमात्मा कबीर साहिब जी के चरणों में गिरकर सत्यनाम सच्चानाम प्राप्त किया। तब शान्ति पाई तथा अपने प्रभु की महिमा देश विदेश में गाई। जब सतनाम का जाप दिया तब नानक जी की काल लोक से मुक्ति हुई।. तलवंडी, शेइखुपुरा जिला, पंजाब Conclusion आपको मेरा Guru Nanak Dev Ji Biography बहुत अच्छी तरह से समज आया होगा। लेख के जरिये हमने गुरु नानक देव जी के वंशज, गुरु नानक देव जी की जन्म कथा और Guru Nanak Dev Ji History in hindi से सम्बंधित जानकारी दी है। अगर आपको अन्य अभिनेता के जीवन परिचय के बारे में जानना चाहते है। तो कमेंट करके जरूर बता सकते है।! यज्ञोपवित संस्कार वाले दिन नानक ने जनेऊ पहनने से साफ इंकार कर दिया. गुरु नानक की पत्नी का नाम क्या था? नानक ने अपने उपदेशों को छोटी-छोटी कविताओं के रूप में दिए थे जिन्हें सिखों के पांचवें गुरू अर्जुन ने आदि ग्रन्थ में संकलित किया. नानक देव का विवाह वर्ष 1487 में गुरदासपुर जिले के रहने वाले मूला की कन्या सुलाखनी से हुआ था.

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